
ऋग्वेद के रहस्यमय अश्विनी कुमार वास्तव में कौन हैं?
क्या वे केवल देवताओं के वैद्य हैं—जो रोगियों को स्वस्थ करते हैं, वृद्धों को युवा बनाते हैं, अंधों को दृष्टि देते हैं और संकट में पड़े मनुष्यों को बचाते हैं?
या उनके चमत्कारों के पीछेमानव शरीर, प्राणशक्ति और चेतना से जुड़ा कोई गहरा वैदिक रहस्यछिपा है?
ऋग्वेद में अश्विनी कुमारों का वर्णन अत्यंत अद्भुत और रहस्यमय रूप में मिलता है। वे उषा के साथ आते हैं, दिव्य रथ पर विचरण करते हैं, रोगों को दूर करते हैं, जीवनशक्ति प्रदान करते हैं, अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं और अनेक ऋषियों तथा साधकों को असाधारण संकटों से मुक्त करते हैं।
लेकिन इन कथाओं का वास्तविक अर्थ क्या है?
दधीचि को प्राप्त मधुविद्या, अत्रि की अग्निकुंड से मुक्ति, कण्व की दृष्टि की पुनःप्राप्ति, विश्वपला के लोहे के पैर, च्यवन का पुनर्यौवन और भुज्यु का समुद्र से उद्धार—क्या ये केवल चमत्कारिक कथाएँ हैं?
या इनके भीतर वेद का कोई गूढ़ ज्ञान छिपा है?
इस पुस्तक में कौशल किशोर ऋग्वेद के अश्विनी-सूक्तों और उनसे संबंधित आख्यानों का गहन अध्ययन करते हुए इस रहस्य की पड़ताल करते हैं।
ऋग्वेद के पहले पाँच मंडलों की इनसे संबंधी ऋचाओं के अर्थों में लेखक अश्विनी कुमारों कोप्राण और अपान के युग्मके रूप में देखते हैं। इस दृष्टि से उनके रथ, उनके उपचार, उनके द्वारा किए गए उद्धार और उनके चमत्कारी कार्य एक नए अर्थ में दिखाई देने लगते हैं।
