महाभारत की कहानी भाग १

महाभारत विश्व का सबसे लोकप्रिय , सबसे बड़ा और सबसे अधिक प्रभावित करने वाला महाकाव्य है। किसी भी काव्य में कोई भी विधा, कोई भी विचार, कोई भी व्यक्तित्व इस प्रकार का नहीं है, जो इस महाकाव्य से प्रभावित नहीं हो। धर्म , अर्थ, काम, और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग यह अद्भुत कहानियों के द्वारा दिखलाता है। आज इस काव्य को सीरियल, फिल्म, आदि के द्वारा भी दिखलाया जा रहा है।
आप सोच रहे होंगे कि यदि महाभारत इतने तरीके से दिखलाया और पढ़ जा रहा है, तो एक नए पुस्तक शृंखला की आवश्यकता क्या है?
इसके उत्तर के लिए आपको इसे पढ़ना होगा।

इस पुस्तक का सैंपल अभी किन्डल से डाउन लोड कर (mybook.to/MahabharataH1) पढ़ लीजिए । इस छोटे भाग से ही आपको कुछ खास अंतर तुरंत दिखेगा ।
कहानी को कुरु वंश और कुरु क्षेत्र की कहानी से शुरू किया गया है, और साथ में उस महान दैवी योजना को बतलाया गया है, जो महाभारत का कारण है। फिर गंगा, वसु को श्राप और उनके पृथ्वी पर आने, और व्यास और देव व्रत के जन्म की कहानी है । शांतनु की पीढ़ी के बाद भीष्म और उनके भाइयों की कहानी , और फिर अगले पीढ़ी की कहानी है।
भीष्म के साथ काशी की राजकुमारी का प्रतिशोध, और परशुराम से युद्ध की कहानी का विवरण है। कर्ण की जन्म के साथ परशुराम से शिक्षा और श्राप की कहानी भी है। मूल महाभारत में ये कहानी अलग-अलग स्थान में है।
इसी प्रकार एक-एक घटना को स्पष्ट प्रकार से और सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है ।
वारणावत के षडयन्त्र, पांडवों का भागना, हिडिंब और हिडिंबा की कहानी, एकचक्र निवास, और द्रौपदी स्वयंवर की कहानी के बाद राज्य का बंटवारा , और पांडवों द्वारा इंद्रप्रस्थ में राज्य, राजसूय यज्ञ की कहानियों के साथ आप अर्जुन के बनवास की कहानी को भी पढ़ कर आनंद उठायेंगे । सुभद्रा हरण की कहानी और द्रौपदी से उनके मिलन की कहानी के अलावे आप जरासंध वध की कहानी को काफी चाव से पढ़ेंगे । पांडवों के विश्व विजय, और शिशुपाल वध की अद्भुत कहानी के बाद ये भाग दुःखांत की ओर जाता है ।
दुर्योधन की ईर्ष्या की आग, और जुए का खेल, पांडवों के बनवास के साथ इस भाग की कहानी समाप्त होती है। द्रौपदी का अपमान, और भीम की प्रतिज्ञा तो आप जानते ही हैं।
देर मत करें, इस भाग को शीघ्र पढ़ें , और मीडिया द्वारा गलत बताई जानकारी से मुक्त होवें – इस मनोरंजक कहानी को पढ़ कर ।

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