महाभारत की कहानी तीसरा भाग

महाभारत विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य है, विस्तार में , विषय वस्तु में, चरित्र चित्रण में।

इसके विस्तार के कारण, और प्रस्तुति के तरीके के कारण आज कल लोग इसको न पढ़ कर इसको मीडिया के विभिन्न स्त्रोतों से समझने की कोशिश करते हैं।

यदि आप इसे एक सरल भाषा में पूर्ण रूप से पढ़ सकें, तो  ये महाभारत की कहानी और चरित्रों को सही प्रकार जानने में सहायक होगा।
इसी हेतु, महाभारत को चार भागों में सरल भाषा में कहानी के प्रवाह में लेखक ने आपके लिए प्रस्तुत किया है ।
यह तीसरा भाग पांडवों के अज्ञात वास के वर्णन से शुरू होता है, जिसमें विराट के पास छुपे  रूप में जाकर सभी पांडवों और द्रौपदी द्वारा नौकरी करने की शांति से  रहने की कहानी है।

भीम द्वारा मल्ल युद्ध में भाग लेने, और  कीचक की हरकतों के कारण छिपे रहकर द्रौपदी की इज्जत बचाने की अद्भुत कहानी भी है।

अज्ञात वास की अवधि को पूर्ण करते ही पांडवों को विराट के लिए दो युद्ध करने का मौका मिलता है। चार भाई तो विराट की सेना के साथ सुशर्मा से युद्ध में भाग लेते हैं , अर्जुन राजकुमार उत्तर को सारथी बना  कौरवों की विशाल सेना से लड़ कर उसे पराजित कर देते हैं। युद्ध में अर्जुन के अपरिमित शौर्य की ये कहानी है। 
अभिमन्यु का विराट की पुत्री उत्तरा से विवाह, और फिर दुर्योधन द्वारा पांडवों को राज्य वापस नहीं करने पर युद्ध और शांति की साथ-साथ तैयारी का सुंदर विवरण  है।

धृतराष्ट्र का पुत्रों की भलाई चाहते हुए दुर्योधन की इच्छा के प्रति पूर्ण समर्पण दिखता है, जो संजय, विदुर और कृष्ण के शांति प्रयासों से अप्रभावित रहता है।
इस पुस्तक में एक पूरी रात विदुर और संत सुजाता द्वारा धृतराष्ट्र को धर्म की शिक्षा का विस्तृत विवरण, जो विदुर नीति के नाम से प्रसिद्ध है, को मूल संस्कृत और हिन्दी  में अद्भुत प्रकार से प्रस्तुत किया गया है। कृष्ण के शांति के संदेश और प्रयास को, पांडवों द्वारा पाँच गाँव लेकर भी शांति स्वीकार करने की इच्छा को जानें। दुर्योधन द्वारा  उनको गिरफ्तार करने की सोच को जानने के बाद कृष्ण द्वारा  विराट रूप का दर्शन कुरु सभा में दिया जाता  है।
कृष्ण द्वारा और फिर कुंती द्वारा भी कर्ण को पांडवों के बड़े भाई होने की जानकारी देने , और दुर्योधन का साथ नहीं छोड़ने का कर्ण का अद्भुत निर्णय  उनके चरित्र को स्पष्ट करता  है। फिर युद्ध की तैयारी, और  भीष्म का शिखण्डी से युद्ध न करने का निर्णय की कहानी को हम पढ़ते हैं।

संजय द्वारा युद्ध के पूर्व दिव्य दृष्टि से पृथ्वी के गोले के रूप में और सभी महाद्वीपों के साथ सटीक विवरण आश्चर्य से भर देता है। संजय द्वारा  भारत भूमि के विवरण , युद्ध के लिए सेना की  तैयारी , और कुरुक्षेत्र में सेनाओं के आमने-सामने आने की जानकर भी है। 

ज्ञान और नीति की सबसे प्रसिद्ध पुस्तक  भागवत गीता को भी इसी भाग में पढ़ने का आनंद मिलता है । कृष्ण के द्वारा अर्जुन को विराट रूप का  दर्शन दिया जान- इसी भाग में दूसरे विराट रूप को भी आप देख पाएंगे ।

वास्तव में विदुर नीति और भागवत गीता का महाभारत से संबंध भी शायद आप भूल गए होंगे, जो इसी भाग में विस्तार से वर्णित हैं।
आइए, महाभारत के इस भाग में विस्तार से इन और अन्य कहानियों को अत्यंत मनोरंजक और सरल भाषा में पढ़ें, और आनंदित हों ।

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